प्रेम अकर्मक क्रिया है
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इच्छाएँ
जय गुरुदेव , एक से अनेक होने की इच्छा से उत्पन्न जीवन में इच्छाएँ केवल और केवल सतही हैं। गहरे तल पर जीवन इच्छा रहित है। धन्यवाद
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जय गुरुदेव , एक से अनेक होने की इच्छा से उत्पन्न जीवन में इच्छाएँ केवल और केवल सतही हैं। गहरे तल पर जीवन इच्छा रहित है। धन्यवाद
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जा रहा था दूर , बुलाया गया। इधर उधर की बातों में उलझाया गया। भूलने के लायक नहीं था , भुलाया गया। मरी थी देह , रूह जिंदा थी , तब भी...
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दूसरे की गलतियों को क्षोभपूर्ण व्यक्त करना नकारात्मकता है , इस प्रक्रिया में कहने वाले और सुनने वाले दोनों ही व्यथित हो जाते हैं। दूस...
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